कुंडली में ग्रहों के विशेष संयोग

कुंडली में ग्रहों के विशेष संयोग से व्यक्ति काले जादू के प्रभाव में आता हैं।
यदि कुंडली में सूर्य, चंद्र, शनि, मंगल ग्रह विशेष भावों में राहु-केतु से पीड़ित होते हैं
तभी नकारात्मक तंत्र-मंत्र व्यक्ति पर असर डालते हैं। जिस व्यक्ति का लग्न व सूर्य कमजोर होते हैं
उन पर काला जादू अधिक प्रभाव डालता है।
यदि कुंडली में ग्रहण योग है या राहु बहुत अनिष्टकारी स्थिति में है या शनि की टेढ़ी दृष्टि है या मंगल-शनि का संयोग है या चंद्र-शनि का संयोग हो तो भी जातक ऋणात्मक शक्तियों के प्रभाव में आता है।
कुंडली में अगर लग्न में चंद्र के साथ राहु हो और पांचवे और नौवें भाव में क्रूर ग्रह स्थित हों।
इस योग में व्यक्ति अभिचार कर्म से पीड़ित होता है।
यदि गोचर में भी यही स्थिति हो तो अवश्य ऊपरी बाधाएं तंग करती हैं।
यदि कुंडली में शनि, राहु, केतु या मंगल में से कोई भी ग्रह सप्तम भाव में हो तो ऐसे लोग भी ऊपरी बाधा से परेशान रहते हैं।
यदि कुंडली में शनि-मंगल-राहु की युति हो तो उसे भी प्रेत बाधा तंग करती है।
उक्त योगों में दशा-अर्न्तदशा में भी ये ग्रह आते हों और गोचर में भी इन योगों की उपस्थिति हो तो समझ लें
कि जातक या जातिका इस कष्ट से अवश्य परेशान हैं। राहु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा हो और चंद्र दशापति राहु से भाव 6, 8 या 12 में बलहीन हो, तो व्यक्ति अभिचार से ग्रसित होता है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार पूर्वा भाद्रपद,उत्तराभाद्रपद,ज्येष्ठा,
अनुराधा, स्वाति या भरणी नक्षत्र में शनि के स्थित होने पर शनिवार को गृह-निर्माण आरंभ नहीं करना चाहिए, अन्यथा वह घर राक्षसों, भूतों और पिशाचों से ग्रस्त हो जाएगा।