Month: March 2019

जानिये अपने मूलांक के बारे मे

जानिये अपने मूलांक के बारे मे 1 जिसका जन्म 1,10,19,28 को हुआ हो, उसका मूलांक एक होता है। गुस्सा जल्दी आता है। 2 जिसका जन्म 2,11,20, 29 को होता है, उसका मूलांक दो होता है। ये चंचल स्वभाव के होते हैं, स्थिर नहीं रहते । इनका मन एक स्थान पर स्थिर नहीं रहता। 3 जिसका […]

संयुक्त ग्रहों के उपाय

संयुक्त ग्रहों के उपाय 1- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में शुक्र और सूर्य की युति किसी भी भाव में हो तो जातक को दुर्गा पूजन लाभदायक होगा । 2- सूर्य.शनि की युति कुण्डली के किसी भी भाव में होने पर जातक बादाम,नारियल बहते पानी में बहाए। 3- सूर्य.राहू की युति होने पर जातक जौ […]

हथेली की यह रेखाएं

हथेली की यह रेखाएं बताती हैं कैसे और कितने धनवान बनेंगे हमारे हमारे आंख,नाक और दूसरे अंगों की तरह हथेली की रेखाओं का भी अर्थ है। समुद्रशास्त्र में हाथेली की रेखाओं,अंगों की बनावट और चेहरे के अनुसार व्यक्ति की खूबियों और कमियों का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि कौन सी रेखा […]

शुक्र ग्रह को कैसे बनाएं बलशाली

शुक्र ग्रह को कैसे बनाएं बलशाली,जानिए लाल किताब से कुंडली के प्रत्येक भाव या खाने अनुसार शुक्र के शुभ-अशुभ प्रभाव को लाल किताब में विस्तृत रूप से समझाकर उसके उपाय बताए गए हैं। यहां प्रस्तुत है प्रत्येक भाव में शुक्र की स्थित और सावधानी के बारे में संक्षिप्त और सामान्य जानकारी। विशेषता : बैल, गाय। […]

जन्म कुंडली मे पंचम स्थान संतान

विद्वान मित्रों,जन्म कुंडली के पंचम भाव से सन्तान का विचार किया जाता हैं। ऐसा क्यों होता है? ये सब ग्रहों की वजह से होता है। यहाँ पर हम ऐसी बातों को जानने और समझने का प्रयास करेंगें की आप भी जान सकें कि संतान होगी या नहीं। जन्म कुंडली मे पंचम स्थान संतान का होता […]

राहु को कैंसर का कारक माना गया है

राहु को कैंसर का कारक माना गया है! 1-कैंसर शब्द या रोग से आज हर कोई परिचित है। इसका नाम सुनते ही हाथ पांव फूल जाते हैं और मृत्यु सामने दिखने लगती है। कैंसर के 90% प्रतिशत मामलों में मृत्यु हो भी जाती है। ज्योतिष से कैंसर जैसे भयानक रोग की उत्पत्ति में कौन कौन […]

द्रेष्काण कुण्डली का फल कैसे विचारें

द्रेष्काण कुण्डली का फल कैसे विचारें:! द्रेष्काण कुंडली जन्मकुंडली में बनी रहती है। द्रेष्काण अर्थात राशि के तीसरे भाग को कहते हैं। राशि का तीसरा भाग 10अंश का होता है। एक राशि में तीन द्रेष्काण होते हैं-प्रथम द्रेष्काण 0 से 10अंश तक होता है इसे नारद कहते हैं, दूसरा द्रेष्काण 11 से 20 अंश तक […]

शनि और सूर्य एक साथ

शनि_और_सूर्य_एक_साथ कुंडली में शनि सूर्य के योग को शुभ नहीं कहा जाता है। यह युति जीवन में संघर्ष बढ़ाने वाली मानी जाती है। शनि सूर्य एक साथ होने पर व्यक्ति को आजीविका के लिए संघर्ष का सामना करना पड़ता है। करियर की शुरूआत ही संघर्षपूर्ण होती है। शनि सूर्य के अंशों में जितनी निकटता होगी, […]

कुंडली में ग्रहों के विशेष संयोग

कुंडली में ग्रहों के विशेष संयोग से व्यक्ति काले जादू के प्रभाव में आता हैं। यदि कुंडली में सूर्य, चंद्र, शनि, मंगल ग्रह विशेष भावों में राहु-केतु से पीड़ित होते हैं तभी नकारात्मक तंत्र-मंत्र व्यक्ति पर असर डालते हैं। जिस व्यक्ति का लग्न व सूर्य कमजोर होते हैं उन पर काला जादू अधिक प्रभाव डालता […]

कर्क और सिंह लग्न

1-कर्क और सिंह लग्न को छोड़कर 4 भाव मे मंगल बहुत खराब होता है ऐसा मंगल जीवन भर दुखी रखता है और दया रहित होता है जातक , 2-अष्टमेष 8 भाव मे हो तो मारक ना होकर आयु की वृद्धि करता है 3-लग्नेश और 6 भाव के स्वामी का एक्स्चेंज हो तो जातक रोगी ना […]

वैदिक ज्योतिष में रोग का निर्धारण

वैदिक ज्योतिष में रोग का निर्धारण उत्तम स्वास्थ्य के बिना कोई भी सुख वास्तव मैं सुख नहीं है , इसीलिए हमारे पूर्वजों ने निरोगी काया को जीवन का पहला सुख माना । हमे कुंडली से भी जातक के स्वास्थ्य के विषय में बहुत जानकारी मिलती है , बस इसका एकाग्रचित होकर विश्लेषण की जरूरत भर […]

कुंडली में अष्टम भाव का परिचय

कुंडली में अष्टम भाव का परिचय 1-अष्टम भाव से व्यक्ति की आयु व मृत्यु के स्वरुप का विचार किया जाता है| इस दृष्टि से अष्टम भाव का महत्व किसी भी प्रकार से कम नही है| क्योंकि यदि मनुष्य दीर्घजीवी ही नही तो वह जीवन के समस्त विषयों का आनंद कैसे उठा सकता है? अष्टम भाव […]

चन्द्र मंगल योग

चन्द्र मंगल योग : भविष्य प्रारब्ध कर्मो के अच्छे-बुरे परिणामों की फल श्रुति होता है। जीवन में अच्छे-बुरे का हेतु कर्म सिद्धान्त ही है। हम अपनी संकल्प शक्ति के बल पर कर्मफलों को अपने अनुसार भोगने का प्रयास करते हैं अथवा अपने आपको भाग्य पर रहने के लिए छो़ड देते हैं अहंकार किसी व्यक्ति के […]

कर्क लग्‍न वालों के लिए मित्र और शत्रु

कर्क लग्‍न वालों के लिए मित्र और शत्रु 1: कर्क लग्‍न में सूर्य धन भाव का स्‍वामी होता है। साथ ही साथ वह लग्‍नेश चंद्रमा का मित्र है इसलि‍ए यदि कर्क लग्‍न वाले जातक को धनाभाव हो या आंखों में कष्‍ट हो तो माणिक्‍य पहनना लाभ देता है। लेकिन धन भाव के साथ दूसरा भाव […]

जब लग्न में बुध हो

जब लग्न में बुध हो लग्न का बुध जातक को वाक् पटु व वाचाल बनाता है। लग्न में बुध होने पर ये जातक वाणी के धनी होते हैं। इनका ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ अच्छा होता है। ये व्यक्ति ज्ञान पिपासु होते हैं, बुद्धिमान होते हैं, मगर जल्दबाज व अधीर होते हैं। लेखन में इनकी विशेष रुचि […]